आसान भाषा में कहें तो, एल्कलाइन (Alkaline) और एसिडिक (Acidic) फूड का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि उन्हें खाने और पचाने के बाद वे हमारे शरीर में किस तरह…
सरल शब्दों में कहें तो, तीसरी आँख (Third Eye) कोई शारीरिक अंग नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की ‘बोध’ या ‘समझ’ की चरम सीमा है। जहाँ हमारी दो आँखें “बाहर” का संसार…
सारा संसार वृत्तियों का खेल है। अगर हम ईमानदारी से आत्म-निरीक्षण (Self-observation) करें, तो आप चौंका जायेंगे । ज्यादातर मामलों में हम अपने जीवन को नहीं चला रहे हैं, बल्कि वृत्तियाँ हमें…
दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए, तो आदमी जीवन भर जिस मूल बीमारी का इलाज करने की कोशिश करता है, उसे ‘अपूर्णता’ (Incompleteness) कहते हैं। वह हमेशा खुद को अधूरा महसूस…
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में संसार को ‘दुखालयम अशाश्वतम’ कहा है। यानी यह संसार दुखों का घर (Library of Sorrows) है और यह अस्थायी है। इसके पीछे के गहरे और तार्किक कारण…