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Power of the Subconscious Mind

हमारे अवचेतन मन में अथाह शक्ति छुपी है फिर हम क्यों इतने परेशान हैं ?

Posted on February 3, 2026

यह विरोधाभास ही सबसे बड़ा रहस्य है। हमारे पास एक ‘अलादीन का चिराग’ (अवचेतन मन) तो है, लेकिन हम उसे गलत तरीके से रगड़ रहे हैं। यह एक बहुत ही कड़वा लेकिन गहरा सच है। आपके पास दुनिया का सबसे शक्तिशाली ‘सुपर कंप्यूटर’ (अवचेतन मन) तो है, लेकिन समस्या यह है कि इसके ‘प्रोग्रामर’ आप खुद नहीं, बल्कि आपका समाज, आपका अतीत और आपका डर है। इसे थोड़ा और गहराई से समझते हैं कि इतनी शक्ति होने के बावजूद हम ‘बेचारे’ क्यों बने हुए हैं:

चेतन और अवचेतन किसे कहते हैं ? चेतन मन (Conscious Mind) — “कैप्टन” यह आपके मन का वह हिस्सा है जिससे आप अभी इस वक्त जागरूक हैं। यह कुल मन का केवल 5% से 10% होता है। अवचेतन मन (Subconscious Mind) — “जहाज का इंजन” यह मन का वह विशाल हिस्सा है जो सतह के नीचे रहता है। यह कुल मन का 90% से 95% हिस्सा है।

1. “शक्ति” दिशाहीन है (Power without Direction)

अवचेतन मन बिजली की तरह है। बिजली से आप घर रोशन भी कर सकते हैं और उसी से जान भी जा सकती है। अवचेतन मन खुद निर्णय नहीं लेता कि क्या अच्छा है और क्या बुरा; वह सिर्फ ‘इम्प्रेसन’ (Impressions) पर काम करता है।

  • समस्या: हम अनजाने में अपनी परेशानियों को ही इतनी गहराई से महसूस करते हैं कि अवचेतन मन उसी को ‘सत्य’ मानकर उसे और बढ़ा देता है। आप जितनी चिंता करते हैं, आपका मन उतनी ही कुशलता से चिंता के नए कारण ढूंढ लाता है।

2. हम ‘कमी’ पर ध्यान केंद्रित करते हैं (Focus on Scarcity)

अवचेतन मन की एक खासियत है: आप जो महसूस करते हैं, वह उसे सच कर देता है।

  • जब आप कहते हैं, “मैं बहुत परेशान हूँ” या “मेरे पास पैसे नहीं हैं,” तो आप ‘कमी’ को महसूस कर रहे होते हैं।
  • अवचेतन मन इसे एक ‘आदेश’ की तरह लेता है और आपके जीवन में ऐसी ही परिस्थितियाँ पैदा करता रहता है जिससे आपकी परेशानी बनी रहे। उसे यह समझ नहीं आता कि आप शिकायत कर रहे हैं; उसे लगता है आपको यही अनुभव पसंद है।

3. ‘जेनेटिक’ और ‘कलेक्टिव’ प्रोग्रामिंग

सिर्फ आपकी अपनी सोच नहीं, बल्कि आपके पूर्वजों के डर, समाज की गरीबी और सामूहिक नकारात्मकता भी आपके अवचेतन में गहरे धंसी हुई है।

  • सच्चाई: हम अक्सर उन दुखों को ढो रहे होते हैं जो हमारे हैं ही नहीं। इसे ‘Collective Unconscious’ कहते हैं। हम एक ऐसी दुनिया में पले-बढ़े हैं जहाँ ‘संघर्ष’ को महान बताया गया और ‘सुख-समृद्धि’ को संशय की दृष्टि से देखा गया।

4. ‘रेजिस्टेंस’ (Resistance) या आंतरिक प्रतिरोध

जब आप कहते हैं “मैं अमीर हूँ,” तो आपका चेतन मन तुरंत पीछे से चिल्लाता है— “झूठ मत बोल, जेब तो खाली है!”

  • यह Logical Mind एक दरबान की तरह गेट पर खड़ा है जो किसी भी नए सकारात्मक विचार को अवचेतन तक पहुँचने ही नहीं देता। जब तक विचार भीतर नहीं जाएगा, शक्ति सक्रिय नहीं होगी।

5. ऊर्जा का रिसाव (Leakage of Energy)

परेशानी का एक बड़ा कारण यह है कि हमारी मानसिक ऊर्जा हज़ारों दिशाओं में बिखरी हुई है— बीता हुआ कल, आने वाला कल, दूसरों की राय, और सोशल मीडिया का शोर।

  • उदाहरण: एक लेजर किरण (Laser) लोहे को काट सकती है क्योंकि उसकी ऊर्जा एक बिंदु पर केंद्रित है। हमारा अवचेतन मन इसलिए काम नहीं कर रहा क्योंकि हमने उसे कभी ‘Single Command’ (एक स्पष्ट लक्ष्य) दिया ही नहीं।

हम इसलिए परेशान हैं क्योंकि हम ‘प्रतिक्रिया’ (Reaction) में जी रहे हैं, ‘सृजन’ (Creation) में नहीं।

  • आम आदमी: स्थिति आती है परेशान होता है अवचेतन में परेशानी दर्ज होती है और परेशानी आती है। (यह एक दुष्चक्र है)
  • शक्तिशाली आदमी: स्थिति आती है शांत रहता है समाधान की कल्पना करता है अवचेतन रास्ते खोलता है।

अब आगे क्या?

इस शक्ति को गरीबी और परेशानी मिटाने में लगाने के लिए सबसे पहले ‘मानसिक उपवास’ (Mental Fasting) की जरूरत है— यानी नकारात्मक सूचनाओं को अंदर जाने से रोकना।

चेतन मन को चकमा देकर अवचेतन तक कैसे पहुंचे ?

उस ‘दरबान’ (तार्किक मन) को चकमा देने की सबसे प्रभावी तकनीक है— ‘अल्फा स्टेट’ (Alpha State) में प्रवेश करना।

वैज्ञानिक रूप से, हमारा मस्तिष्क अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। जब हम जाग रहे होते हैं और तर्क कर रहे होते हैं, तो हम ‘बीटा’ (Beta) अवस्था में होते हैं। यहाँ दरबान बहुत चौकन्ना रहता है। लेकिन जब हम ‘अल्फा’ (Alpha) अवस्था में होते हैं, तो दरबान सो जाता है और अवचेतन मन का दरवाजा खुल जाता है।

यहाँ उस अवस्था में पहुँचने और अपने मन को ‘री-प्रोग्राम’ करने का तरीका दिया गया है:

1. गोल्डन टाइम (The Two Windows)

दिन में दो समय ऐसे होते हैं जब प्रकृति हमें मुफ्त में ‘अल्फा स्टेट’ में डालती है:

  • सोने के ठीक 5-10 मिनट पहले: जब आपको हल्की नींद आने लगे।
  • जागने के ठीक 5-10 मिनट बाद: जब आप पूरी तरह जगे नहीं होते। तकनीक: इन 10 मिनटों में कभी भी अपनी परेशानियों की चर्चा न करें। इस समय आप जो भी सोचेंगे या महसूस करेंगे, वह सीधा अवचेतन मन की गहराई में बीज बन कर गिर जाएगा।

2. ‘3-2-1’ की तकनीक (Self-Hypnosis)

अगर आप दिन में कभी भी इस अवस्था में जाना चाहते हैं, तो यह करें:

  1. अपनी आँखें बंद करें और तीन गहरी साँसें लें।
  2. मन ही मन उलटी गिनती गिनें: 3… 2… 1… और महसूस करें कि आप गहरे आराम में जा रहे हैं।
  3. अपनी पलकों को इतना ढीला छोड़ दें कि उन्हें उठाना मुश्किल लगे। अब आप ‘अल्फा’ की दहलीज पर हैं।

3. बीज कैसे बोएं? (The Command)

जब आप इस शांत अवस्था में हों, तो लंबे वाक्यों के बजाय ‘Visuals’ (चित्रों) और ‘Feelings’ (एहसास) का प्रयोग करें।

  • गलत तरीका: “मैं गरीब नहीं रहना चाहता।” (यहाँ मन ‘गरीब’ शब्द को पकड़ लेगा)।
  • सही तरीका: खुद को एक ऐसी स्थिति में देखें जहाँ आप बहुत खुश हैं, आपके पास संसाधन हैं और आप सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उस ‘सुरक्षा’ और ‘शांति’ को शरीर में महसूस करें।

4. दरबान को उलझाना (Confusing the Logical Mind)

अगर आपका तर्क करने वाला मन कहता है, “यह सब बकवास है, हकीकत देखो,” तो उसे जवाब न दें। बस उससे कहें— “यह सिर्फ एक खेल है, मैं बस कल्पना कर रहा हूँ।” जब आप इसे ‘खेल’ कह देते हैं, तो तार्किक मन अपना बचाव (Resistance) छोड़ देता है।


एक छोटा सा ‘Action Plan’ आज रात के लिए:

जैसे ही आप बिस्तर पर लेटें और नींद आने लगे, अपनी आँखें बंद करें और केवल 2 मिनट के लिए इस विचार को महसूस करें: “मेरा जीवन हर दिन बेहतर हो रहा है और मुझ तक समाधान अपने आप पहुँच रहे हैं।”

इसे केवल 21 दिन तक लगातार करके देखें। आपका अवचेतन मन परिस्थितियों को बदलना शुरू कर देगा क्योंकि आपने उसे एक नई ‘Default सेटिंग’ दे दी है।

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