सरल शब्दों में कहें तो, तीसरी आँख (Third Eye) कोई शारीरिक अंग नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की ‘बोध’ या ‘समझ’ की चरम सीमा है। जहाँ हमारी दो आँखें “बाहर” का संसार…
सारा संसार वृत्तियों का खेल है। अगर हम ईमानदारी से आत्म-निरीक्षण (Self-observation) करें, तो आप चौंका जायेंगे । ज्यादातर मामलों में हम अपने जीवन को नहीं चला रहे हैं, बल्कि वृत्तियाँ हमें…
दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए, तो आदमी जीवन भर जिस मूल बीमारी का इलाज करने की कोशिश करता है, उसे ‘अपूर्णता’ (Incompleteness) कहते हैं। वह हमेशा खुद को अधूरा महसूस…
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में संसार को ‘दुखालयम अशाश्वतम’ कहा है। यानी यह संसार दुखों का घर (Library of Sorrows) है और यह अस्थायी है। इसके पीछे के गहरे और तार्किक कारण…
महाभारत की कथा के अनुसार, राजा परीक्षित को 7 दिनों के भीतर मृत्यु होने का श्राप मिला था। जब राजा परीक्षित को पता चला कि उनके पास जीवित रहने के लिए केवल…
प्राचीन काल में हमारे ऋषि-मुनि कायाकल्प का प्रयोग करते थे। जिससे उनका उम्र काफी बढ़ जाता था और वे हष्ट-पुष्ट, तरो-ताजा महशूस करते थे।। आज विज्ञानं ने एक टेलोमेरेस एंजाइम की खोज…
योग और आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में ‘वीर्य’ (Vital Fluid) को सबसे मूल्यवान धातु माना गया है। ब्रह्मचर्य का पालन न करने या ऊर्जा का अत्यधिक अपव्यय करने से केवल शारीरिक ही…
जीवन का उद्देश्य केवल जन्म लेना, भोग भोगना और मर जाना नहीं है। आखिरी मंजिल है अपने कर्मों के बंधनों को काटकर उस अवस्था को प्राप्त करना जहाँ आपको दोबारा भटकना न…
यह एक बहुत ही कड़वा लेकिन गहरा सच है। इंसान ने चाँद पर कदम रख दिया, समुद्र की गहराइयां नाप लीं और अब AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) बना रहा है, लेकिन वह अपने…