यह विरोधाभास ही मनुष्य की सबसे बड़ी त्रासदी है। आँखों का होना केवल ‘देखने’ (Looking) की क्षमता है, लेकिन ‘बोध’ (Perceiving) के बिना इंसान अंधा ही रहता है। योग और अध्यात्म के…
स्वामी विवेकानंद का यह विचार उनके जीवन दर्शन का निचोड़ है। उन्होंने यह बात इसलिए कही थी क्योंकि वे जानते थे कि जानकारी (Information) इकट्ठा करना ‘शिक्षा’ नहीं है, बल्कि ‘मन को…
यह विरोधाभास ही सबसे बड़ा रहस्य है। हमारे पास एक ‘अलादीन का चिराग’ (अवचेतन मन) तो है, लेकिन हम उसे गलत तरीके से रगड़ रहे हैं। यह एक बहुत ही कड़वा लेकिन…
संसार में वैसे तो अनेक दुख हैं—बीमारी, गरीबी, अपमान—लेकिन मौत को सबसे बड़ा दुख इसलिए माना जाता है क्योंकि यह मनुष्य के सबसे बुनियादी डर और उसकी सबसे गहरी आसक्ति (Attachment) पर…
योग और अध्यात्म में ‘ऊर्ध्वगमन’ (Urdhvagaman) का अर्थ है ऊर्जा का नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित होना। सरल शब्दों में, यह हमारी चेतना और प्राण शक्ति (Vital Energy) को निम्न केंद्रों…
हम बीमार क्यों पड़ते हैं? हमारी बीमारी का मुख्य कारण शरीर से टॉक्सिन्स का बाहर न निकल पाना है। हम रोज़ अपने घर में झाड़ू-पोंछा करते हैं, लेकिन शरीर में जमा होने…