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metabolic disturbance

सभी बीमारियों की जड़ है मेटाबोलिक डिस्टर्बेंस

Posted on February 23, 2026

जब तक हम शरीर के मेटाबोलिक सिस्टम को नहीं समझेंगे तब तक किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त रहेंगे। इसे बिना ठीक किये कितना भी ईलाज करा लो फिर भी कुछ न कुछ बीमारी लगी रहेगी। जैसे खेत में पानी ले जाने वाली नाली सही न हो तो सारा पानी दूसरी ओर बह जाता है लेकिन नाली सही हो तो धर-धराकर पानी खेत में पहुंच जाता है और खेत की सिचाई हो जाती है। वैसे ही जब शरीर का मेटाबोलिक सिस्टम सही हो तो सारा खाना-पीना शरीर में लगता है और ऊर्जा बनाता है। आधुनिक डॉक्टर नहीं चाहेंगे कि कोई यह समझे और करें। क्योंकि उनका धंधा ही बंद हो जायेगा। हमारे ऋषि मुनि इसे समझते थे और करते थे।

मेटाबोलिक सिस्टम क्या है ?

जब खाना खाते हैं तो भोजन हमारे छोटी आंत (Small Intestine) में जाकर पूरी तरह पचकर वह ग्लूकोज, अमीनो एसिड (प्रोटीन) और विटामिन जैसे सूक्ष्म कणों में टूट जाता है। आंतों की दीवारों पर छोटे-छोटे बालों जैसी संरचनाएं होती हैं जिन्हें विली (Villi) कहते हैं। ये विली इन पोषक तत्वों को सोख लेती हैं। आंतों की विली से जुड़ी हुई सूक्ष्म नसें आपस में मिलकर एक बड़ी नस बनाती हैं। जिसे ‘हेपेटिक पोर्टल वेन’ (Hepatic Portal Vein) कहा जाता है। यह नस सारा ‘कच्चा माल’ (पोषक तत्व और टॉक्सिन्स) ले जाकर लिवर के पास पंहुचा देती है। जैसे ही आंतों से निकला हुआ रस लिवर में पहुँचता है, लिवर तीन मुख्य काम करता है :

फिल्ट्रेशन (सफाई): अगर भोजन के साथ कोई जहर (Toxins), बैक्टीरिया या हानिकारक रसायन आ गए हैं, तो लिवर उन्हें नष्ट कर देता है ताकि वे दिल और दिमाग तक न पहुँचें।

प्रोसेसिंग: लिवर तय करता है कि किस पोषक तत्व का क्या करना है। जैसे—फालतू ग्लूकोज को 'ग्लाइकोजन' बनाकर स्टोर कर लेना।

वितरण (Distribution): सफाई और प्रोसेसिंग के बाद, लिवर उस शुद्ध रस को 'हेपेटिक वेन' के जरिए दिल की तरफ भेज देता है, जहाँ से वह पूरे शरीर में पंप होकर पहुंच जाता है।

मेटाबोलिक डिस्टर्बेंस क्या है ?

जब हम बहुत ज्यादा चीनी या गलत खाना खाते हैं, तो आंतों से बहुत अधिक ‘कचरा’ पोर्टल वेन के जरिए लिवर में पहुँचने लगता है। लिवर थक जाता है और उस कचरे को साफ नहीं कर पाता। यही से ‘फैटी लिवर’ और ‘मेटाबोलिक डिस्टर्बेंस’ की शुरुआत होती है। आईये इसके कारण को समझते हैं ।

1. “ज्यादा चीनी” का असली मतलब क्या है?

जब हम ‘चीनी’ कहते हैं, तो इसका मतलब केवल वह सफेद दानेदार शक्कर नहीं है जो आप चाय में डालते हैं। शरीर के लिए चीनी के तीन रूप सबसे खतरनाक हैं:

  • छिपी हुई चीनी (Hidden Sugars): केचप, ब्रेड, पैकेट बंद सूप, और फ्लेवर्ड दही में भारी मात्रा में चीनी होती है। यह छुपी हुई चीनी ही हमारी सभी बीमारियों कारण बनती है।
  • तरल चीनी (Liquid Sugar): कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और यहाँ तक कि बाजार में मिलने वाले ‘फ्रूट जूस’ भी। ये सीधे लिवर पर हमला करते हैं क्योंकि इनमें फाइबर नहीं होता।
  • रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: मैदा, सफेद चावल और पास्ता। शरीर इन्हें बहुत तेजी से ग्लूकोज (चीनी) में बदल देता है, जिससे इंसुलिन का स्तर एकदम से बढ़ जाता है।

2. “गलत खानपान” की पहचान क्या है?

गलत खानपान वह है जो आपके मेटाबॉलिज्म को धीमा करे और शरीर में सूजन (Inflammation) पैदा करे। इसके ३ मुख्य विलेन हैं:

क. रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल्स (Seed Oils)

सोयाबीन तेल, सूरजमुखी का तेल (Sunflower oil) या पाम ऑयल। इन्हें बहुत ऊंचे तापमान पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इनमें ‘ओमेगा-6’ की मात्रा बढ़ जाती है। यह तेल आपकी धमनियों और लिवर में सूजन पैदा करता है।

ख. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF)

बिस्किट, नमकीन, डिब्बाबंद खाना और इंस्टेंट नूडल्स। इनमें तीन चीजें एक साथ होती हैं: चीनी + खराब नमक + रिफाइंड तेल। यह कॉम्बिनेशन दिमाग के ‘रिवॉर्ड सेंटर’ को हैक कर लेता है, जिससे आपको बार-बार भूख लगती है।

ग. फाइबर की कमी

अगर आपके खाने में फल, सब्जियां और साबुत अनाज (छिलके वाली दालें) नहीं हैं, तो आपकी आंतों के अच्छे बैक्टीरिया भूखे मर जाते हैं। जैसा कि हमने पहले बात की थी, बिना फाइबर के भोजन ‘पोर्टल वेन’ के जरिए लिवर पर सीधा बोझ डालता है।

3. ‘सही’ और ‘गलत’ की तुलना

श्रेणीगलत खानपान (बीमारी का कारण)सही खानपान (मेटाबॉलिक हीलिंग)
अनाजमैदा, सफेद ब्रेड, पॉलिश वाले चावल।चोकरयुक्त आटा, बाजरा, ओट्स, ब्राउन राइस।
तेलरिफाइंड ऑयल, डालडा (Vanaspati)।देसी घी, कच्ची घानी सरसों का तेल, नारियल तेल।
मीठासफेद चीनी, हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप।सीमित मात्रा में फल, थोड़ा गुड़ या शहद।
प्रोटीनप्रोसेस्ड मीट, बहुत ज्यादा तली हुई दालें।पनीर, अंडे, अंकुरित अनाज, दालें।

4. खाने का ‘समय’ भी गलत हो सकता है

केवल ‘क्या’ खा रहे हैं यह जरूरी नहीं है, बल्कि ‘कब’ खा रहे हैं यह भी मेटाबॉलिज्म तय करता है।

  • देर रात को भारी भोजन करना।
  • दिन भर कुछ न कुछ ‘चबाते’ रहना (Munching), जिससे इंसुलिन को कभी आराम नहीं मिलता।

एक सुनहरी सलाह: जो भोजन सीधे प्रकृति से आता है (पेड़-पौधों से), वह ‘सही’ है। जो भोजन कारखानों और मशीनों से होकर, पैकेट में बंद होकर आता है, वह ‘गलत’ होने की संभावना ९०% है।

सही खानपान क्या है ?

जो भोजन सीधे प्रकृति से आता है (पेड़-पौधों से), वह ‘सही’ है। जो भोजन कारखानों और मशीनों से होकर, पैकेट में बंद होकर आता है, वही बीमारी का मूल जड़ है। अगर आपको रोगो से मुक्त होकर जीना है तो अपने भोजन में फल-फ्रूट और सलाद पहले खाएं उसके बाद बाकी खाना खाएं।

FAQ.

मेटाबॉलिक सिस्टम क्या है? (What is Metabolic System)
बीमारियों का मूल कारण (Root cause of diseases)
लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय (How to keep liver healthy)
गलत खान-पान के नुकसान (Side effects of bad eating habits)
इंसुलिन रेजिस्टेंस और मोटापा (Insulin resistance and obesity)

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